रांची। झारखंड की राजधानी रांची में पिछले 12 दिनों से हजारों छात्र शांतिपूर्ण धरना दे रहे हैं। यह आंदोलन JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों को लेकर हो रहा है। छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में दिन-रात धरने पर बैठे हैं और इसे सत्याग्रह का रूप दे रहे हैं।
आंदोलन क्यों हो रहा है?
2 जुलाई को JPSC ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित किया। इसके बाद कई अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। छात्रों का आरोप है कि कट-ऑफ जारी नहीं की गई, एक कथित OMR शीट वायरल हुई और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही। इसके बाद मुख्य परीक्षा भी स्थगित कर दी गई। छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि पूरे भर्ती सिस्टम में सुधार की जरूरत है।
छात्रों की मुख्य मांगें
- JPSC और JSSC की विवादित परीक्षाओं की CBI और ED से जांच कराई जाए।
- भर्ती घोटाले में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
- भविष्य की परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी तरीके से कराई जाएं।
- विवादों में आई एजेंसी TDPL की भूमिका की जांच हो और जरूरत पड़ने पर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए।
- लंबित परीक्षाओं का नया कैलेंडर जारी किया जाए और अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट मिले।
आंदोलन को किसका समर्थन मिल रहा है?
इस आंदोलन को अब दूसरे राज्यों से भी समर्थन मिलने लगा है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के जरिए अनशन पर बैठे छात्र नेताओं से बात की और उनका हौसला बढ़ाया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी छात्रों की मांगों का समर्थन किया है। इसके अलावा दिल्ली, बिहार, गुजरात और पश्चिम बंगाल से कई छात्र संगठन और सामाजिक संस्थाएं आंदोलनकारियों के लिए भोजन, पानी और अन्य जरूरी सामान भेज रही हैं।
सरकार का क्या कहना है?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। सरकार ने बातचीत के लिए एक समिति बनाने का फैसला किया है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने 7 अगस्त को विधानसभा घेराव का भी ऐलान किया है।
शांतिपूर्ण आंदोलन बना मिसाल
इस आंदोलन की खास बात यह है कि छात्र पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों को मंच से दूर रखा है और अपने लिए एक आचार संहिता भी बनाई है। मंच से केवल भर्ती परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर ही बात की जा रही है।
फिलहाल झारखंड का यह छात्र आंदोलन केवल भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि युवाओं की पारदर्शी भर्ती, निष्पक्ष जांच और बेहतर व्यवस्था की मांग का बड़ा प्रतीक बन चुका है।
